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12 महीने बंद, नागपंचमी पर 24 घंटे खुले नागचंद्रेश्वर के पट दर्शन को उमड़ा आस्था का सैलाब

किशोर सिंह राजपूत 9981757273

उज्जैन। में नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का महासंयोग श्रद्धालुओं के लिए खास बन गया है। रविवार मध्यरात्रि भगवान नागचंद्रेश्वर के पट खुलते ही महाकाल मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर विराजमान भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं।

भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर की खासियत है कि इसके पट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। इस बार इसी दिन बाबा महाकाल की सवारी भी निकल रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रविवार रात 12 बजते ही महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इससे करीब आधे घंटे पहले रात 11:30 बजे प्रथम पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई।

श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज ने मध्यरात्रि में भगवान नागचंद्रेश्वर का पूजन-अभिषेक किया। प्रथम पूजा संपन्न होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए गए। पट खुलते ही भक्तों का भगवान नागचंद्रेश्वर के दरबार में पहुंचना शुरू हो गया। भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन साल में केवल 24 घंटे ही होते हैं। नागपंचमी के दिन मंदिर के पट खुलने का इंतजार श्रद्धालुओं को पूरे साल रहता है। इसी विशेष दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की परंपरा है। मध्यरात्रि में पहली पूजा संपन्न हुई। सोमवार दोपहर 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से दूसरी पूजा होगी। वहीं शाम को बाबा महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर के पुजारी एवं पुरोहित विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा अपने आप में अनूठी है। यहां भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश के साथ फन फैलाए नाग पर विराजमान हैं। भगवान शिव के गले और भुजाओं पर भी नाग लिपटे हुए हैं। प्रतिमा के साथ नंदी और सिंह भी विराजमान हैं।

महाकाल मंदिर का शिखर तीन खंडों में विभाजित है। सबसे नीचे भगवान महाकालेश्वर, दूसरे खंड में भगवान ओंकारेश्वर और तीसरे तल पर भगवान नागचंद्रेश्वर विराजमान हैं। इस बार नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग होने से श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। एक ओर भगवान नागचंद्रेश्वर के 24 घंटे दर्शन हो रहे हैं, तो दूसरी ओर बाबा महाकाल की सवारी भी निकलेगी।

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अलग-अलग प्रवेश और निकासी मार्ग निर्धारित किए हैं। नागचंद्रेश्वर के सामान्य दर्शन के लिए कर्कराज पार्किंग से प्रवेश व्यवस्था की गई है, जबकि शीघ्र दर्शन के लिए हरसिद्धि पाल की ओर से प्रवेश निर्धारित किया गया है।

बुजुर्गों, दिव्यांगों और निःशक्त श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर अस्थायी जूता स्टैंड और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है। नागपंचमी और बाबा महाकाल की सवारी एक ही दिन होने से प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है। श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन कराने के साथ यातायात व्यवस्था को भी सुचारू रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।

महाकाल मंदिर में सामान्य और शीघ्र दर्शन के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था निर्धारित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित और व्यवस्थित रखा जा सके।

किशोर सिंह राजपूत 9981757273

उज्जैन। में नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का महासंयोग श्रद्धालुओं के लिए खास बन गया है। रविवार मध्यरात्रि भगवान नागचंद्रेश्वर के पट खुलते ही महाकाल मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर विराजमान भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे हैं।

भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर की खासियत है कि इसके पट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी पर 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। इस बार इसी दिन बाबा महाकाल की सवारी भी निकल रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रविवार रात 12 बजते ही महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इससे करीब आधे घंटे पहले रात 11:30 बजे प्रथम पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई।

श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज ने मध्यरात्रि में भगवान नागचंद्रेश्वर का पूजन-अभिषेक किया। प्रथम पूजा संपन्न होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए गए। पट खुलते ही भक्तों का भगवान नागचंद्रेश्वर के दरबार में पहुंचना शुरू हो गया। भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन साल में केवल 24 घंटे ही होते हैं। नागपंचमी के दिन मंदिर के पट खुलने का इंतजार श्रद्धालुओं को पूरे साल रहता है। इसी विशेष दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की परंपरा है। मध्यरात्रि में पहली पूजा संपन्न हुई। सोमवार दोपहर 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से दूसरी पूजा होगी। वहीं शाम को बाबा महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर के पुजारी एवं पुरोहित विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा अपने आप में अनूठी है। यहां भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश के साथ फन फैलाए नाग पर विराजमान हैं। भगवान शिव के गले और भुजाओं पर भी नाग लिपटे हुए हैं। प्रतिमा के साथ नंदी और सिंह भी विराजमान हैं।

महाकाल मंदिर का शिखर तीन खंडों में विभाजित है। सबसे नीचे भगवान महाकालेश्वर, दूसरे खंड में भगवान ओंकारेश्वर और तीसरे तल पर भगवान नागचंद्रेश्वर विराजमान हैं। इस बार नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग होने से श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। एक ओर भगवान नागचंद्रेश्वर के 24 घंटे दर्शन हो रहे हैं, तो दूसरी ओर बाबा महाकाल की सवारी भी निकलेगी।

श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अलग-अलग प्रवेश और निकासी मार्ग निर्धारित किए हैं। नागचंद्रेश्वर के सामान्य दर्शन के लिए कर्कराज पार्किंग से प्रवेश व्यवस्था की गई है, जबकि शीघ्र दर्शन के लिए हरसिद्धि पाल की ओर से प्रवेश निर्धारित किया गया है।

बुजुर्गों, दिव्यांगों और निःशक्त श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अलग-अलग स्थानों पर अस्थायी जूता स्टैंड और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है। नागपंचमी और बाबा महाकाल की सवारी एक ही दिन होने से प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती है। श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित दर्शन कराने के साथ यातायात व्यवस्था को भी सुचारू रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।

महाकाल मंदिर में सामान्य और शीघ्र दर्शन के लिए अलग-अलग प्रवेश व्यवस्था निर्धारित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित और व्यवस्थित रखा जा सके।

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