किशोर सिंह राजपूत शाजापुर
तीन सहआरोपियों को भी 20-20 साल की सजा, विशेष पॉक्सो न्यायालय शाजापुर का फैसला
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शाजापुर। माननीय विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट), जिला शाजापुर ने 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं अपराध में सहयोग करने वाले तीन अन्य आरोपियों को 20-20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया गया है।
जिला मीडिया सेल प्रभारी एवं अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी गोविंद पिता शंकरलाल, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम झुटावद, जिला उज्जैन को धारा 64(2)(एफ)(एम), 65(1) बीएनएस एवं धारा 4(2) पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास एवं 27 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया। इसके अलावा धारा 87 बीएनएस में 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 1 हजार रुपए अर्थदंड तथा धारा 137(2) बीएनएस में 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 1 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
इसी मामले में आरोपी शोभा पति शंकरलाल बोडाना (45), निवासी ग्राम झुटावद, राहुल पिता मांगूलाल चंद्रवंशी (25), निवासी ग्राम पिपलिया पीथा, आलोट, जिला रतलाम तथा मांगू पिता सीताराम चंद्रवंशी (53), निवासी ग्राम पिपलिया पीथा, आलोट, जिला रतलाम को धारा 142 बीएनएस में 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 5 हजार रुपए अर्थदंड तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 16/17 के तहत 20-20 वर्ष का कठोर कारावास एवं 1-1 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया।
घर से गायब हुई थी 13 वर्षीय बालिका
अभियोजन के अनुसार 15 मार्च 2025 को नाबालिग की मां ने कोतवाली थाना शाजापुर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 14 मार्च की रात खाना खाने के बाद मां-बेटी सोए थे। सुबह करीब 5 बजे उठने पर 13 वर्षीय बेटी घर पर नहीं मिली। आसपास और रिश्तेदारों में तलाश करने के बावजूद उसका पता नहीं चला। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
विवेचना के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि नाबालिग आरोपी गोविंद के साथ उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रह रही है। पुलिस टीम गाजियाबाद पहुंची, जहां दोनों किराए के मकान में मिले। पुलिस उन्हें अभिरक्षा में लेकर 20 अगस्त 2025 को शाजापुर लाई।
पहले प्रेम और शादी का झांसा दिया
पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि आरोपी गोविंद करीब छह माह तक उसके घर पर रहा था और दोनों घर की बकरियां चराते थे। इसी दौरान गोविंद ने उसे प्रेम करने और शादी करने की बात कही। इसकी जानकारी नाबालिग की मां को हुई तो उसने बेटी को डांटा। इसके बाद गोविंद ने नाबालिग को उज्जैन जाने वाली बस में बैठाकर अपनी मां शोभा के पास भेज दिया।
इसके बाद शोभा ने अपने जेठ मांगू को बुलाया और नाबालिग को ग्राम पिपलिया पीथा, आलोट, रतलाम भेज दिया, जहां वह करीब एक माह रही। नाबालिग को बाद में पता चला कि मांगू और उसका बेटा राहुल उसे कहीं बेचने की बात कर रहे हैं। इसके बाद राहुल उसे शोभा के खेत पर छोड़कर चला गया और गोविंद को फोन कर बुलाया।
गाजियाबाद ले जाकर रखा पत्नी बनाकर
इसके बाद गोविंद नाबालिग को उज्जैन से ट्रेन के जरिए दिल्ली ले गया। वहां एक मंदिर में शादी करने के बाद दोनों गाजियाबाद में किराए के मकान में रहने लगे। अभियोजन ने मामले में उपलब्ध साक्ष्य और तर्क न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियोजन के साक्ष्यों से सहमत होते हुए चारों आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई।
मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी रमेश सोलंकी ने की।



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