किशोर सिंह राजपूत 9981757273
शाजापुर/उज्जैन। श्रावण के दूसरे सोमवार पर धर्मनगरी उज्जैन में बाबा महाकाल की भक्ति का अलग ही रंग नजर आया। तड़के भस्मारती में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के रुद्र स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर में जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक और विशेष श्रृंगार के बाद भस्म अर्पित की गई। वहीं शाम को राजा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
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महाकालेश्वर मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के लिए भी प्रसिद्ध है। भस्मारती में भस्म का महत्व, महाकाल को उज्जैन का राजा मानने की परंपरा, नागचंद्रेश्वर मंदिर के साल में एक दिन खुलने की मान्यता और उज्जैन को काल की नगरी कहे जाने के पीछे की धार्मिक-सांस्कृतिक अवधारणाएं आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं।
इनमें कुछ बातें धार्मिक मान्यताओं और लोकपरंपराओं पर आधारित हैं, जबकि कुछ दावों का वैज्ञानिक या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद महाकाल की नगरी से जुड़ी ये कथाएं श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था और जिज्ञासा पैदा करती हैं।



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