🔥 ट्रेंडिंग

बैलगाड़ी से जंगल से पानी ला रहे ग्रामीण, नल-जल योजना भी बेअसर

शाजापुर। जिले में गुलाना तहसील के गांव चौकी मुरादाबाद में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए रोज़ जंगलों की ओर बैलगाड़ी लेकर जाना पड़ रहा है। आज़ादी के दशकों बाद भी यहां के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे हैं, जबकि कागज़ों में नल-जल योजना और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।

गांव में हैंडपंप सूख चुके हैं, कुएं जवाब दे चुके हैं, और नल-जल योजना का कोई नामोनिशान नहीं दिखता। महिलाएं और बुजुर्ग कई किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। गर्मी बढ़ते ही हालात और भी भयावह हो गए हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि आंखें मूंदे बैठे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद न तो टैंकर भेजे जा रहे हैं, न ही स्थायी समाधान किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने का दावा करती है, तो चौकी मुरादाबाद के लोगों तक यह सुविधा क्यों नहीं पहुंची?

यह सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की कहानी है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह संकट किसी बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल सकता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार तंत्र कब जागेगा और प्यासे गांव को राहत कब मिलेगी।

शाजापुर। जिले में गुलाना तहसील के गांव चौकी मुरादाबाद में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए रोज़ जंगलों की ओर बैलगाड़ी लेकर जाना पड़ रहा है। आज़ादी के दशकों बाद भी यहां के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे हैं, जबकि कागज़ों में नल-जल योजना और विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।

गांव में हैंडपंप सूख चुके हैं, कुएं जवाब दे चुके हैं, और नल-जल योजना का कोई नामोनिशान नहीं दिखता। महिलाएं और बुजुर्ग कई किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। गर्मी बढ़ते ही हालात और भी भयावह हो गए हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि आंखें मूंदे बैठे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतों के बावजूद न तो टैंकर भेजे जा रहे हैं, न ही स्थायी समाधान किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल पहुंचाने का दावा करती है, तो चौकी मुरादाबाद के लोगों तक यह सुविधा क्यों नहीं पहुंची?

यह सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की कहानी है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह संकट किसी बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल सकता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार तंत्र कब जागेगा और प्यासे गांव को राहत कब मिलेगी।

वाराणसी में बाढ़ को लेकर अलर्ट: DM और पुलिस कमिश्नर ने बोट से किया निरीक्षण,

सरदार पटेल स्कूल में तीन दिवसीय कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव,विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

लाठी डण्डे से मारपीट करने के अपराध में सात लोगों को 02-02 वर्ष का कठोर कारावास एवं जुर्माना

डायल-112 के पायलटों को मिली यूनिफॉर्म और अपॉइंटमेंट लेटर

सावनभर 24 घंटे चला अन्न क्षेत्र, समापन पर दानदाताओं और कावड़ यात्रा संचालकों का सम्मान

error: Content is protected !!