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मनुष्य स्वार्थी नहीं सारथी बनकर के अच्छे कर्म करें पंडित त्रिवेदी

बांके बिहारी ने सारथी के रूप में धर्म निभाया 

पोलायकला । मुकेश शर्मा

अति प्रचीन पांडव कालीन हिमालेश्वर धाम मोरटा केवडी पर चल रही भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भक्तों को कथा श्रवण करवाते हुए भगवताचार्य पंडित लोकेश त्रिवेदी ने कहा कि महाभारत के युद्ध में भी भगवान कृष्ण ने सारथी बनकर करके अपने कर्तव्य पथ का पालन करते हुए आगे बढ़कर अपना धर्म निभाया जबकि दुर्योधन ने युद्ध में सेना मांग कर स्वार्थी बनकर अपने कर्तव्य का पालन किया इसलिए इस कलयुग में मनुष्य को स्वार्थी नहीं सारथी बनकर के कार्य करना चाहिए क्योंकि यहां कलयुग है यहां पर माया का फंदा 24 घंटे मनुष्य के साथ में रहता है यहां फंदा मनुष्य को बिल्कुल नहीं मालूम पढ़ाने देता है कि वहा उसके जीवन को किसी और ले जा रहा है सिर्फ चारों ओर इस संसार मे उसे स्वार्थ ही स्वार्थ नजर आता है लेकिन अगर परमात्मा को प्राप्त करना है तो स्वार्थी बन करके प्राप्त नहीं किया जा सकता सारथी बनकर प्राप्त किया जा सकता है आज मंदिरों में भक्त सिर्फ भगवान से मांगने के लिए ही जाता है देने के लिए नहीं जाता है अगर आपको परमात्मा से मांगना ही है तो सिर्फ बांके बिहारी के चरणो की सेवा मांगे अगर उसके चरण की सेवा आपको मिल गई तो आपको किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत ही नही पड़ेगी जीवन यूं ही स्वर्ग बन जाएगा मेरे बांके बिहारी के लिए अपने जीवन को उसके चरणों में लगा कर तो देखिए वह स्वयं नंगे पैर आपके पास दौड़ा चला आयेगा

कृष्ण जन्म में झूमे श्रद्धालु नंद घर आनंद भयो के जयकारा से गूंजा पांडाल

आज शुक्रवार को भागवत कथा में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया जिसमें टोकरी में कृष्ण स्वरूप बालक को बैठक वासुदेव अपने सिर पर रखकर के मंदिर प्रांगण से ढोल नगाड़े अतिशबाजी के साथ कथा स्थल पहुंचे जहां पर पुष्पवर्षा माखन मिश्री का भोग लुटाकर नंद घर आनंद भयो के जयकारों से पूरा पंडाल गुंजायमान हो गया भक्तिमय कृष्ण के भजनों पर भक्तों ने खूब नृत्य किया जन्मोत्सव के अवसर पर समिति के सभी सदस्यों के द्वारा पंडाल को आकर्षक सजाया गया था

बांके बिहारी ने सारथी के रूप में धर्म निभाया 

पोलायकला । मुकेश शर्मा

अति प्रचीन पांडव कालीन हिमालेश्वर धाम मोरटा केवडी पर चल रही भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भक्तों को कथा श्रवण करवाते हुए भगवताचार्य पंडित लोकेश त्रिवेदी ने कहा कि महाभारत के युद्ध में भी भगवान कृष्ण ने सारथी बनकर करके अपने कर्तव्य पथ का पालन करते हुए आगे बढ़कर अपना धर्म निभाया जबकि दुर्योधन ने युद्ध में सेना मांग कर स्वार्थी बनकर अपने कर्तव्य का पालन किया इसलिए इस कलयुग में मनुष्य को स्वार्थी नहीं सारथी बनकर के कार्य करना चाहिए क्योंकि यहां कलयुग है यहां पर माया का फंदा 24 घंटे मनुष्य के साथ में रहता है यहां फंदा मनुष्य को बिल्कुल नहीं मालूम पढ़ाने देता है कि वहा उसके जीवन को किसी और ले जा रहा है सिर्फ चारों ओर इस संसार मे उसे स्वार्थ ही स्वार्थ नजर आता है लेकिन अगर परमात्मा को प्राप्त करना है तो स्वार्थी बन करके प्राप्त नहीं किया जा सकता सारथी बनकर प्राप्त किया जा सकता है आज मंदिरों में भक्त सिर्फ भगवान से मांगने के लिए ही जाता है देने के लिए नहीं जाता है अगर आपको परमात्मा से मांगना ही है तो सिर्फ बांके बिहारी के चरणो की सेवा मांगे अगर उसके चरण की सेवा आपको मिल गई तो आपको किसी के आगे हाथ फैलाने की जरूरत ही नही पड़ेगी जीवन यूं ही स्वर्ग बन जाएगा मेरे बांके बिहारी के लिए अपने जीवन को उसके चरणों में लगा कर तो देखिए वह स्वयं नंगे पैर आपके पास दौड़ा चला आयेगा

कृष्ण जन्म में झूमे श्रद्धालु नंद घर आनंद भयो के जयकारा से गूंजा पांडाल

आज शुक्रवार को भागवत कथा में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया जिसमें टोकरी में कृष्ण स्वरूप बालक को बैठक वासुदेव अपने सिर पर रखकर के मंदिर प्रांगण से ढोल नगाड़े अतिशबाजी के साथ कथा स्थल पहुंचे जहां पर पुष्पवर्षा माखन मिश्री का भोग लुटाकर नंद घर आनंद भयो के जयकारों से पूरा पंडाल गुंजायमान हो गया भक्तिमय कृष्ण के भजनों पर भक्तों ने खूब नृत्य किया जन्मोत्सव के अवसर पर समिति के सभी सदस्यों के द्वारा पंडाल को आकर्षक सजाया गया था

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