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प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए कृषक प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए कृषक प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

विराट सवेरा बालाघाट।राणा हनुमान सिंह कृषि विज्ञान केंद्र बड़गांव एवं बॉयफ–मॉयल सामुदायिक विकास कार्यक्रम उकवा के संयुक्त तत्वावधान में 12 जनवरी को एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में क्षेत्र के 20 कृषकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.आर. धुवारे ने किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए बताया कि रासायनिक खेती से भूमि की उर्वरता एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि खेती की लागत कम करने एवं पर्यावरण को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना आवश्यक है, जिसकी शुरुआत कृषक छोटे-छोटे क्षेत्रों से कर सकते हैं। डॉ. धुवारे ने प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रबी फसलों जैसे चना, सरसों एवं गेहूं में प्राकृतिक खेती द्वारा बेहतर उत्पादन की संभावनाओं पर जानकारी दी। साथ ही रबी फसलों में जैविक खेती एवं उन्नत कृषि तकनीकों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभ समझाते हुए जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्निअस्त्र, वापसा प्रबंधन एवं मल्चिंग तैयार करने की विधियों की जानकारी दी। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वर शक्ति बढ़ाने, लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि करने तथा पर्यावरण प्रदूषण से बचाव के लिए प्राकृतिक खेती को आवश्यक बताया। कार्यक्रम में बॉयफ के  ओम मुंगुलमारे ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न इकाइयों जैसे प्राकृतिक खेती इकाई, पौध उत्पादन इकाई, सब्जी उत्पादन इकाई, मशरूम इकाई, मुर्गी पालन इकाई, एजोला इकाई, नाडेप इकाई, वर्मी कम्पोस्ट इकाई एवं कृषि यंत्र इकाई का भ्रमण भी कराया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र की श अन्नपूर्णा शर्मा एवं  दिलीप कुमार शिव का सराहनीय योगदान रहा।

प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए कृषक प्रशिक्षण का हुआ आयोजन

विराट सवेरा बालाघाट।राणा हनुमान सिंह कृषि विज्ञान केंद्र बड़गांव एवं बॉयफ–मॉयल सामुदायिक विकास कार्यक्रम उकवा के संयुक्त तत्वावधान में 12 जनवरी को एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में क्षेत्र के 20 कृषकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.आर. धुवारे ने किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए बताया कि रासायनिक खेती से भूमि की उर्वरता एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है तथा खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि खेती की लागत कम करने एवं पर्यावरण को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना आवश्यक है, जिसकी शुरुआत कृषक छोटे-छोटे क्षेत्रों से कर सकते हैं। डॉ. धुवारे ने प्राकृतिक खेती एवं जैविक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए रबी फसलों जैसे चना, सरसों एवं गेहूं में प्राकृतिक खेती द्वारा बेहतर उत्पादन की संभावनाओं पर जानकारी दी। साथ ही रबी फसलों में जैविक खेती एवं उन्नत कृषि तकनीकों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभ समझाते हुए जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्निअस्त्र, वापसा प्रबंधन एवं मल्चिंग तैयार करने की विधियों की जानकारी दी। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वर शक्ति बढ़ाने, लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि करने तथा पर्यावरण प्रदूषण से बचाव के लिए प्राकृतिक खेती को आवश्यक बताया। कार्यक्रम में बॉयफ के  ओम मुंगुलमारे ने किसानों को रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम कर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न इकाइयों जैसे प्राकृतिक खेती इकाई, पौध उत्पादन इकाई, सब्जी उत्पादन इकाई, मशरूम इकाई, मुर्गी पालन इकाई, एजोला इकाई, नाडेप इकाई, वर्मी कम्पोस्ट इकाई एवं कृषि यंत्र इकाई का भ्रमण भी कराया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केंद्र की श अन्नपूर्णा शर्मा एवं  दिलीप कुमार शिव का सराहनीय योगदान रहा।

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