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झाड़ू बनाने वाले समाज की पीड़ा कीमत आज भी मात्र 10 रुपये

शाजापुर। जिले की ग्राम पंचायत गिरवर में झाड़ू बनाने समाज के लोग पिछले कई वर्षों से पारंपरिक रूप से झाड़ू बनाने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन महंगाई बढ़ने के बावजूद उनके उत्पाद की कीमत आज भी मात्र 10 रुपये ही बनी हुई है।

समाज के लोगों का कहना है कि जहां एक ओर रोजमर्रा की सभी वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं उनके बनाए झाड़ू का मूल्य वर्षों से 10 रुपए है। जिससे आजीविका चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

झाड़ू बनाने वाले समाज की महिलाओं ने बताया कि वे पीढ़ियों से इस कार्य में लगी हुई हैं, लेकिन आज तक उन्हें सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि आज भी उनके पक्के मकान नहीं बन पाए हैं और ना ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिला है।

समाज की सदस्य तेजू बाई ने बताया कि वे सालों से झाड़ू बनाने का कार्य कर रही हैं, लेकिन मेहनत के अनुरूप आय नहीं मिल रही है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उनके उत्पाद का उचित मूल्य तय किया जाये उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए, ताकि उनका जीवन स्तर सुधर

शाजापुर। जिले की ग्राम पंचायत गिरवर में झाड़ू बनाने समाज के लोग पिछले कई वर्षों से पारंपरिक रूप से झाड़ू बनाने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन महंगाई बढ़ने के बावजूद उनके उत्पाद की कीमत आज भी मात्र 10 रुपये ही बनी हुई है।

समाज के लोगों का कहना है कि जहां एक ओर रोजमर्रा की सभी वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं उनके बनाए झाड़ू का मूल्य वर्षों से 10 रुपए है। जिससे आजीविका चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

झाड़ू बनाने वाले समाज की महिलाओं ने बताया कि वे पीढ़ियों से इस कार्य में लगी हुई हैं, लेकिन आज तक उन्हें सरकारी योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि आज भी उनके पक्के मकान नहीं बन पाए हैं और ना ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिला है।

समाज की सदस्य तेजू बाई ने बताया कि वे सालों से झाड़ू बनाने का कार्य कर रही हैं, लेकिन मेहनत के अनुरूप आय नहीं मिल रही है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उनके उत्पाद का उचित मूल्य तय किया जाये उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए, ताकि उनका जीवन स्तर सुधर

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