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यह कैसा ‘वाटर प्लस’ शहर है! कहाँ है ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार?

 

इंदौर को साल 2021 में भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने देश के पहले ‘वाटर प्लस’ शहर के रूप में प्रमाणित किया था। इंदौर नगर पालिक निगम ने यह तमगा 7000 गंदे आउटफाल को बंद करने और रोजाना 312 मिलियन लीटर (MLD) पानी को ट्रीट करने का दावा कर हासिल किया था।

लेकिन कुछ इंच की बारिश में तालाब बनती सड़कें, कान्ह नदी में बहती गंदगी और अब दूषित पानी के कारण अस्पतालों के चक्कर काटते भागीरथपुरा इलाके के मरीजों को देखकर लगता है कि निगम के अधिकारियों ने यह तमगा केवल कागजी खानापूर्ति कर हासिल किया था, जो अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।कहने के लिए इंदौर में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार है। पार्षद से लेकर प्रधानमंत्री तक एक ही राजनीतिक दल से नाता रखते हैं। प्रदेश के मुखिया यहाँ के प्रभारी मंत्री हैं, नगरीय प्रशासन मंत्री यहाँ के विधायक हैं और प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले विधायक, सांसद और महापौर भी यहीं से हैं। इसके बावजूद, किसी के भी हाथ में अधिकारी और कर्मचारियों की लगाम नहीं है।

जहाँ एक ओर जननेता अपने समर्थकों के साथ बड़ी गाड़ियों में बैठकर रील बनाने में मगन हैं, वहीं दूसरी ओर टैक्स भरने वाली जनता गुहार लगा रही है। शहर के लगभग 40 फीसदी इलाकों में गंदे पानी की समस्या है। जब रहवासी सरकारी दफ्तरों में विरोध करने पहुँचते हैं, तो निगम अधिकारी कभी कुतर्कों से तो कभी डरा-धमकाकर उन्हें वापस भेज देते हैं।

भागीरथपुरा के रहवासियों के साथ भी यही हुआ। वे घटना के कुछ दिन पहले स्मार्ट सिटी दफ्तर में गंदे पानी की शिकायत लेकर गए थे, लेकिन उनकी समस्या को अनसुना कर दिया गया। इसकी बानगी अब हमारे सामने है—तीन लोग अपनी जान गँवा चुके हैं और सैकड़ों बीमार हैं। सरकार मुआवजे का कितना भी मरहम लगा ले, लेकिन इंदौर की जनता अब ट्रैफिक जाम, नगर निगम की लापरवाही, बिगड़ती कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुकी है। अगर वक्त रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ‘इंजन’ की गिनती बदल भी सकती है।

 

इंदौर को साल 2021 में भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने देश के पहले ‘वाटर प्लस’ शहर के रूप में प्रमाणित किया था। इंदौर नगर पालिक निगम ने यह तमगा 7000 गंदे आउटफाल को बंद करने और रोजाना 312 मिलियन लीटर (MLD) पानी को ट्रीट करने का दावा कर हासिल किया था।

लेकिन कुछ इंच की बारिश में तालाब बनती सड़कें, कान्ह नदी में बहती गंदगी और अब दूषित पानी के कारण अस्पतालों के चक्कर काटते भागीरथपुरा इलाके के मरीजों को देखकर लगता है कि निगम के अधिकारियों ने यह तमगा केवल कागजी खानापूर्ति कर हासिल किया था, जो अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।कहने के लिए इंदौर में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार है। पार्षद से लेकर प्रधानमंत्री तक एक ही राजनीतिक दल से नाता रखते हैं। प्रदेश के मुखिया यहाँ के प्रभारी मंत्री हैं, नगरीय प्रशासन मंत्री यहाँ के विधायक हैं और प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले विधायक, सांसद और महापौर भी यहीं से हैं। इसके बावजूद, किसी के भी हाथ में अधिकारी और कर्मचारियों की लगाम नहीं है।

जहाँ एक ओर जननेता अपने समर्थकों के साथ बड़ी गाड़ियों में बैठकर रील बनाने में मगन हैं, वहीं दूसरी ओर टैक्स भरने वाली जनता गुहार लगा रही है। शहर के लगभग 40 फीसदी इलाकों में गंदे पानी की समस्या है। जब रहवासी सरकारी दफ्तरों में विरोध करने पहुँचते हैं, तो निगम अधिकारी कभी कुतर्कों से तो कभी डरा-धमकाकर उन्हें वापस भेज देते हैं।

भागीरथपुरा के रहवासियों के साथ भी यही हुआ। वे घटना के कुछ दिन पहले स्मार्ट सिटी दफ्तर में गंदे पानी की शिकायत लेकर गए थे, लेकिन उनकी समस्या को अनसुना कर दिया गया। इसकी बानगी अब हमारे सामने है—तीन लोग अपनी जान गँवा चुके हैं और सैकड़ों बीमार हैं। सरकार मुआवजे का कितना भी मरहम लगा ले, लेकिन इंदौर की जनता अब ट्रैफिक जाम, नगर निगम की लापरवाही, बिगड़ती कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार से त्रस्त हो चुकी है। अगर वक्त रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ‘इंजन’ की गिनती बदल भी सकती है।

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