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शाजापुर आबकारी में टेंडर घोटाला

शाजापुर आबकारी में टेंडर घोटाला

शाजापुर। प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होने के बाद जहां एक ओर टेंडर प्रक्रिया जारी है, वहीं शाजापुर जिले में इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही द्वारा टेंडर समिति की विधिवत अनुमति के बिना ही टेंडर जारी कर दिए गए।

जानकारी के मुताबिक, आबकारी टेंडर प्रक्रिया में समिति का अनुमोदन अनिवार्य होता है, जिसमें कलेक्टर पदेन अध्यक्ष होते हैं। लेकिन आरोप है कि न तो समिति की बैठक हुई और न ही सदस्यों को इसकी जानकारी दी गई, इसके बावजूद टेंडर जारी कर दिए गए।

क्या निरस्त होंगे टेंडर?

बिना समिति की स्वीकृति के जारी किए गए इन टेंडरों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन्हें निरस्त किया जाएगा। साथ ही यह भी चर्चा है कि यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारी पर क्या कार्रवाई होगी।

ठेका प्रक्रिया भी प्रभावित

शाजापुर जिले में कुल 223 करोड़ रुपये के शराब ठेकों में से अब तक केवल 22 प्रतिशत यानी करीब 43 करोड़ रुपये के ठेके ही उठ पाए हैं, जबकि लगभग 180 करोड़ रुपये के ठेके अभी शेष हैं। इससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

सूत्रों का यह भी कहना है कि जिला आबकारी अधिकारी का मुख्यालय पर नियमित रूप से उपस्थित न रहना और इंदौर से अप-डाउन करना भी प्रक्रिया में देरी का कारण बन रहा है। इससे नीलामी प्रभावित हो रही है और सरकार को राजस्व हानि उठानी पड़ रही है। साथ ही कुछ खास ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि टेंडर प्रक्रिया में समिति की स्वीकृति आवश्यक मानी जाती है। ऐसे में बिना अनुमोदन टेंडर जारी होना नियमों के विपरीत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या जांच के बाद कोई ठोस कार्रवाई होती है।

इस बारे जब आबकारी अधिकारी विनय रंग शाही से बात की तो बताया कि कलेक्टर मैडम की व्यस्तता के कारण अभी साइन नहीं हो पाई है

शाजापुर आबकारी में टेंडर घोटाला

शाजापुर। प्रदेश में नई आबकारी नीति लागू होने के बाद जहां एक ओर टेंडर प्रक्रिया जारी है, वहीं शाजापुर जिले में इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही द्वारा टेंडर समिति की विधिवत अनुमति के बिना ही टेंडर जारी कर दिए गए।

जानकारी के मुताबिक, आबकारी टेंडर प्रक्रिया में समिति का अनुमोदन अनिवार्य होता है, जिसमें कलेक्टर पदेन अध्यक्ष होते हैं। लेकिन आरोप है कि न तो समिति की बैठक हुई और न ही सदस्यों को इसकी जानकारी दी गई, इसके बावजूद टेंडर जारी कर दिए गए।

क्या निरस्त होंगे टेंडर?

बिना समिति की स्वीकृति के जारी किए गए इन टेंडरों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन्हें निरस्त किया जाएगा। साथ ही यह भी चर्चा है कि यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारी पर क्या कार्रवाई होगी।

ठेका प्रक्रिया भी प्रभावित

शाजापुर जिले में कुल 223 करोड़ रुपये के शराब ठेकों में से अब तक केवल 22 प्रतिशत यानी करीब 43 करोड़ रुपये के ठेके ही उठ पाए हैं, जबकि लगभग 180 करोड़ रुपये के ठेके अभी शेष हैं। इससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

सूत्रों का यह भी कहना है कि जिला आबकारी अधिकारी का मुख्यालय पर नियमित रूप से उपस्थित न रहना और इंदौर से अप-डाउन करना भी प्रक्रिया में देरी का कारण बन रहा है। इससे नीलामी प्रभावित हो रही है और सरकार को राजस्व हानि उठानी पड़ रही है। साथ ही कुछ खास ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि टेंडर प्रक्रिया में समिति की स्वीकृति आवश्यक मानी जाती है। ऐसे में बिना अनुमोदन टेंडर जारी होना नियमों के विपरीत माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या जांच के बाद कोई ठोस कार्रवाई होती है।

इस बारे जब आबकारी अधिकारी विनय रंग शाही से बात की तो बताया कि कलेक्टर मैडम की व्यस्तता के कारण अभी साइन नहीं हो पाई है

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