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अमृत पीने वाले देव एवं जहर पीने वाले महादेव के समान पंडित चतुर्भुज चतुर्वेदी

अमृत पीने वाले देव एवं जहर पीने वाले महादेव के समान पंडित चतुर्भुज चतुर्वेदी

नलखेड़ा। देव और दानव ने मिलकर समुद्र मंथन किया । समुद्र ‌मंथन में 14 रत्न सहित जहर भी निकला। अमृत और रत्न सभी ने आपस में बांट लिए मगर जब जहर का नंबर आया तो सभी घबरा गए कि इस हलाहल को कौन पिएगा। सभी ने देवताओं से विनती करी लेकिन कोई भी राजी नहीं हुआ अंत में बाबा भोलेनाथ ने विष को अपने गले में धारण किया तभी तो उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना जाता है अमृत पीने वाले देव एवं विष पीने वाले महादेव कहलाए यानी देवों के देव महादेव आपने कहा कि इंसान एक दूसरे से प्रेम करें एवं निंदा का भाव छोड़कर सत्संगी बने सत्संग ही आपको इस भव से पार लगाएगा शिव पुराण कथा अनेक जगह होती है कई लोग कथा में पहुंचकर कथा श्रवण भी करते हैं लेकिन किस्मत वाले वही लोग होते हैं जो महापुराण कथा सुनकर उसे अपने जीवन में उतारकर भोलेनाथ के प्रिय हो जाते हैं कथा के छठवें दिवस भारी संख्या में भक्तों की उपस्थिति रही ।कथा के विश्राम पर जजमानों द्वारा आरती पूजन कर प्रसाद का वितरण किया गया ।कल दिनांक 31 जनवरी को महाशिवपुराण कथा के विश्राम के साथ ही विगत 7 दिनों से चल रहा नव कुंडात्मक यज्ञहवन का भी समापन होगा । इस अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन रखा गया है सभी भक्तजनों से भंडारे में प्रसादी ग्रहण करने का भी निवेदन किया गया है।

नगर में नव वर्ष के उपलक्ष्य में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 1 जनवरी से

पंडित चतुर्भुज चतुर्वेदी के मुखारविंद से 7 दिन तक बहेगी ज्ञान की गंगा


नलखेड़ा। नगर में प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी नव वर्ष के उपलक्ष्य में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का का आयोजन हो रहा है जिसमें नगर के ही भागवत प्रवक्ता पंडित चतुर्भुज चतुर्वेदी उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराएंगे।
जानकारी देते हुए श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति के सदस्य दाऊलाल मित्तल ने बताया कि प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी नव वर्ष के उपलक्ष्य में 1 जनवरी गुरुवार से 7 जनवरी तक पुलिस थाने के पीछे स्थित नीमा ग्राउंड पर दोपहर 12:00 से 4:00 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है जिससे नगर के ही भागवत प्रवक्ता पंडित चतुर्भुज चतुर्वेदी उपस्थित श्रोताओं को कथा का रसपान कराएंगे।
मित्तल ने बताया कि 1 जनवरी को कथा प्रारंभ होने से पूर्व एक विशाल कलश यात्रा गाजे बाजे ढोल ढमाकों के साथ चौक बाजार स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर से प्रारंभ होगी जो नगर के प्रमुख मार्गो से होती हुई कथा स्थल नीमा ग्राउंड पहुंचेगी। उसके पश्चात श्रीमद् भागवत महापुराण के पूजन के पश्चात कथा प्रारंभ होगी।

17 वर्षों से निरंतर हो रही भागवत कथा

उल्लेखनीय है कि नगर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन नगर के नागरिकों के सहयोग से करीब 17 वर्षों से निरंतर किया जा रहा है। जिसमें कथावाचक पंडित चतुर्भुज चतुर्वेदी 17 वर्षों से उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हैं इस वर्ष भागवत कथा 18 वे वर्ष में प्रवेश करेगी।

अमृत पीने वाले देव एवं जहर पीने वाले महादेव के समान पंडित चतुर्भुज चतुर्वेदी

नलखेड़ा। देव और दानव ने मिलकर समुद्र मंथन किया । समुद्र ‌मंथन में 14 रत्न सहित जहर भी निकला। अमृत और रत्न सभी ने आपस में बांट लिए मगर जब जहर का नंबर आया तो सभी घबरा गए कि इस हलाहल को कौन पिएगा। सभी ने देवताओं से विनती करी लेकिन कोई भी राजी नहीं हुआ अंत में बाबा भोलेनाथ ने विष को अपने गले में धारण किया तभी तो उन्हें नीलकंठ के नाम से जाना जाता है अमृत पीने वाले देव एवं विष पीने वाले महादेव कहलाए यानी देवों के देव महादेव आपने कहा कि इंसान एक दूसरे से प्रेम करें एवं निंदा का भाव छोड़कर सत्संगी बने सत्संग ही आपको इस भव से पार लगाएगा शिव पुराण कथा अनेक जगह होती है कई लोग कथा में पहुंचकर कथा श्रवण भी करते हैं लेकिन किस्मत वाले वही लोग होते हैं जो महापुराण कथा सुनकर उसे अपने जीवन में उतारकर भोलेनाथ के प्रिय हो जाते हैं कथा के छठवें दिवस भारी संख्या में भक्तों की उपस्थिति रही ।कथा के विश्राम पर जजमानों द्वारा आरती पूजन कर प्रसाद का वितरण किया गया ।कल दिनांक 31 जनवरी को महाशिवपुराण कथा के विश्राम के साथ ही विगत 7 दिनों से चल रहा नव कुंडात्मक यज्ञहवन का भी समापन होगा । इस अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन रखा गया है सभी भक्तजनों से भंडारे में प्रसादी ग्रहण करने का भी निवेदन किया गया है।

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