किशोर सिंह राजपूत 9981757273
कलेक्टर न्यायालय शाजापुर ने धारा 115 के तहत ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निजी नाम किए निरस्त
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शाजापुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप शासकीय जमीनों से अवैध कब्जे हटाने और भू-अभिलेखों में हेरफेर को दुरुस्त करने के अभियान के तहत कलेक्टर ऋजु बाफना द्वारा एक ऐतिहासिक राजस्व आदेश पारित किया गया है। न्यायालय ने ग्राम गिरवर स्थित बहुमूल्य शासकीय पहाड़ एवं सार्वजनिक चरनोई (चारागाह) भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अवैध निजी इंद्राजों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।भेरू डूंगरी के पास स्थित ग्राम गिरवर की कुल भूमि जिसका रकबा 19.762 हेक्टर (98 बीघा) भूमि जिसकी अनुमानित कीमत 9 करोड़ सत्राह लाख 60 हजार रूपये हैं। यह संपूर्ण भूमि अब शासकीय रिकॉर्ड में “मध्य प्रदेश शासन” के नाम पर दर्ज होगी। इस प्रकार भेरू डूंगरी स्थित भूमि को कलेक्टर बाफना द्वारा शासकीय दर्ज किये जाने का आदेश पारित किया गया है।
कलेक्टर बाफना द्वारा पूर्व में भी भेरू डूंगरी के पास स्थित ग्राम गिरवर के एक अन्य भूमि सर्वे क्रमांक 1178 रकबा 104 बीघा 18 बिस्वा अर्थात 21.916 हेक्टर जिसकी अनुमानित कीमत 9 करोड़ 70 लाख 40 हजार रूपये हैं, जो कि शासकीय भूमि वापस मध्य प्रदेश शासन के पक्ष में दर्ज किया जाने का आदेश दिया गया था। इस प्रकार अब तक कुल 41.678 हेक्टर भूमि जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 19 करोड़ रूपये हैं।
उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) द्वारा याचिका खारिज होने के बाद कलेक्टर बाफना ने गुणदोष पर अंतिम फैसला किया। तहसीलदार शाजापुर को राजस्व रिकॉर्ड सुधारने और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिये हैं।
सुनवाई के दौरान साक्ष्य देने में असफल रहे अनावेदक स्थगन समाप्त होने के बाद कलेक्टर न्यायालय द्वारा नैसर्गिक न्याय का पालन करते हुए अनावेदकगण को लिखित व मौखिक बहस का पूरा अवसर दिया गया। किंतु, अनावेदक पक्ष इस सार्वजनिक और चरनोई भूमि पर अपना वैध मालिकाना हक साबित करने से संबंधित कोई भी दस्तावेजी या विधिक साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह असफल रहे।
कलेक्टर न्यायालय द्वारा जारी मुख्य आदेश

ग्राम गिरवर के सर्वे क्रमांक 1179 के विभिन्न उप-भागों (यथा 1179/1/2/1, 1179/1/2/2, 1179/1/2/3, 1179/1/2/4, 1179/1/2/5, 1179/1/2/6, 1179/1/3, 1179/1/3/1 आदि) में दर्ज समस्त अवैध निजी भूमिस्वामी प्रविष्टियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया हैं। इस संपूर्ण क्षेत्र को सर्वसम्मत रूप से पुन: मध्यप्रदेश शासन की संपत्ति घोषित किया गया हैं।
शासकीय और सार्वजनिक निस्तार (चरनोई/चारागाह) की भूमियों पर किसी भी निजी व्यक्ति का अधिकार मान्य नहीं किया जा सकता। भू-अभिलेखों में किसी भी समय हुई गंभीर विसंगतियों या धोखाधड़ी को सुधारने के लिए समय-सीमा का कोई बंधन लागू नहीं होता। शासकीय संपत्तियों का संरक्षण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।



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