रोजगार की तलाश में रहने वाला सुभाष अब 05 से 06 लोगो के दे रहा है रोजगार
विराट सवेरा बालाघाट। सही मार्गदर्शन, मेहनत और सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ मिल जाए तो छोटे से व्यवसाय को भी बड़ी पहचान मिल सकती है। ऐसी ही प्रेरणादायी सफलता की कहानी है ग्राम सिकंदरा, तहसील वारासिवनी निवासी सुभाष लिल्हारे की है, जिन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना (PMFME) के माध्यम से अपने पारंपरिक व्यवसाय को आधुनिक रूप देकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। पहले स्वयं के लिए रोजगार की तलाश में रहने वाला सुभाष अब 05 से 06 लोगो को हर दिन रोजगार दे रहा है।
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सुभाष लिल्हारे पूर्व में पारंपरिक तरीके से छोटी-छोटी कढ़ाइयों में दूध से मावा एवं घी का निर्माण कर सीमित स्तर पर व्यवसाय कर रहे थे। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में आने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना की जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत पंजाब नेशनल बैंक, वारासिवनी से जनवरी 2025 में 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिस पर 35 प्रतिशत अनुदान भी प्रदान किया गया। इस सहयोग से उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय का विस्तार किया।
वर्तमान में सुभाष द्वारा प्रतिदिन लगभग 1100 से 1200 लीटर दूध का संग्रह एवं प्रसंस्करण किया जा रहा है। उनकी डेयरी इकाई में पनीर, घी, मावा एवं दही जैसे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनका प्रतिदिन का कारोबार लगभग 50 से 55 हजार रुपये तक पहुँच चुका है। इन उत्पादों का विक्रय स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बालाघाट, लालबर्रा के होटल, डेयरी नीड्स दुकानों एवं खुदरा विक्रेताओं को किया जा रहा है। इसके अलावा नागपुर (महाराष्ट्र) स्थित दिनसा कंपनी को भी नियमित रूप से सप्लाई की जा रही है।
सुभाष बताते हैं कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें प्रतिदिन 10 से 11 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। साथ ही उनकी इकाई से 5 से 6 श्रमिकों को प्रतिदिन रोजगार भी मिल रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं। तहसील कटंगी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आगमन के अवसर पर सरस्वती डेयरी के घी, पनीर, मावा एवं दही के उत्पादों का प्रदर्शन भी किया गया, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अवलोकन कर सराहा गया। यह क्षण सुभाष के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय रहा।
अपनी सफलता से उत्साहित सुभाष लिल्हारे भविष्य में डेयरी व्यवसाय को और बड़े स्तर पर विस्तार देने की इच्छा रखते हैं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए उद्यानिकी विभाग एवं पंजाब नेशनल बैंक के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का सशक्त माध्यम प्रदान किया है। श्री सुभाष लिल्हारे की यह कहानी न केवल ग्रामीण उद्यमियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं सही हाथों में पहुँचें तो आर्थिक और सामाजिक बदलाव की मजबूत नींव रख सकती हैं।



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