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संघ शताब्दी वर्ष में प्रबुद्ध जन गोष्ठी आयोजित, राष्ट्र निर्माण के विविध विषयों पर मंथन

शाजापुर। संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मक्सी एवं पोलाय खंड में प्रबुद्ध जनों की विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय ग्राम विकास सह-संयोजक श्री शंभू प्रसाद गिरि ने संबोधित करते हुए कहा कि संघ के स्वयंसेवक केवल संगठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय समाज के साथ मिलकर शिक्षा, सेवा, स्वास्थ्य जैसे मूलभूत विषयों पर कार्य करते हुए सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि धर्म रक्षा, सामाजिक समरसता, गौसेवा, परिवार संस्कार, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्राम विकास जैसे क्षेत्रों में संघ के प्रयासों से सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं। भारत के ये कार्य अब विश्व में आस्था के केंद्र बनते जा रहे हैं। राष्ट्र को मातृभाव देना और उसे नित्य प्रार्थना में दोहराना भारतीय संस्कृति की अद्भुत विशेषता है।

श्री गिरि ने आगे कहा कि भारत का निर्माण संघर्ष, साहस और शौर्य की अनुपम गाथा है, और संघ का स्वयंसेवक अपने भाव एवं आचरण से समाज में साहस और अनुशासन की प्रेरणा देता है। उन्होंने “नर सेवा नारायण सेवा”, “धर्म रक्षितो रक्षितः” तथा “जीवन से देश बड़ा होता है” जैसे मूल्यों को स्वयंसेवक के जीवन का आधार बताया।

गोष्ठी में पंच परिवर्तन विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को परिवार संस्कारों में शामिल करने पर जोर दिया और कहा कि “एक पेड़ 100 पुत्रों के समान” मानकर प्रकृति की सेवा करनी चाहिए। साथ ही, स्वत्व की पहचान और नागरिक कर्तव्यों के पालन से ही आत्मनिर्भर और वैभवशाली भारत का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें श्री शंभूप्रसाद गिरी, श्री दिलीप जी कलमोदिया एवं श्री अखिलेश जी मंडलोई (खंड संघचालक, मक्सी-पोलाय) उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पुस्तक परिचय, जिज्ञासा समाधान, वंदे मातरम एवं राष्ट्रगान का आयोजन भी हुआ। गोष्ठी स्थल पर गो-उत्पाद एवं साहित्य प्रसार के लिए अस्थायी केंद्र भी लगाए गए।

इस अवसर पर मक्सी एवं पोलाय खंड से चयनित 197 प्रबुद्ध जनों एवं मातृशक्ति ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

शाजापुर। संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मक्सी एवं पोलाय खंड में प्रबुद्ध जनों की विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय ग्राम विकास सह-संयोजक श्री शंभू प्रसाद गिरि ने संबोधित करते हुए कहा कि संघ के स्वयंसेवक केवल संगठन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय समाज के साथ मिलकर शिक्षा, सेवा, स्वास्थ्य जैसे मूलभूत विषयों पर कार्य करते हुए सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं।

उन्होंने कहा कि धर्म रक्षा, सामाजिक समरसता, गौसेवा, परिवार संस्कार, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्राम विकास जैसे क्षेत्रों में संघ के प्रयासों से सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं। भारत के ये कार्य अब विश्व में आस्था के केंद्र बनते जा रहे हैं। राष्ट्र को मातृभाव देना और उसे नित्य प्रार्थना में दोहराना भारतीय संस्कृति की अद्भुत विशेषता है।

श्री गिरि ने आगे कहा कि भारत का निर्माण संघर्ष, साहस और शौर्य की अनुपम गाथा है, और संघ का स्वयंसेवक अपने भाव एवं आचरण से समाज में साहस और अनुशासन की प्रेरणा देता है। उन्होंने “नर सेवा नारायण सेवा”, “धर्म रक्षितो रक्षितः” तथा “जीवन से देश बड़ा होता है” जैसे मूल्यों को स्वयंसेवक के जीवन का आधार बताया।

गोष्ठी में पंच परिवर्तन विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को परिवार संस्कारों में शामिल करने पर जोर दिया और कहा कि “एक पेड़ 100 पुत्रों के समान” मानकर प्रकृति की सेवा करनी चाहिए। साथ ही, स्वत्व की पहचान और नागरिक कर्तव्यों के पालन से ही आत्मनिर्भर और वैभवशाली भारत का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें श्री शंभूप्रसाद गिरी, श्री दिलीप जी कलमोदिया एवं श्री अखिलेश जी मंडलोई (खंड संघचालक, मक्सी-पोलाय) उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पुस्तक परिचय, जिज्ञासा समाधान, वंदे मातरम एवं राष्ट्रगान का आयोजन भी हुआ। गोष्ठी स्थल पर गो-उत्पाद एवं साहित्य प्रसार के लिए अस्थायी केंद्र भी लगाए गए।

इस अवसर पर मक्सी एवं पोलाय खंड से चयनित 197 प्रबुद्ध जनों एवं मातृशक्ति ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

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