🔥 ट्रेंडिंग

भीषण गर्मी में पक्षियों के लिए जल-पात्र व घोंसले बनाकर संरक्षण का संदेश

शाजापुर।अप्रैल माह की तेज गर्मी में जब तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच रहा है, वहीं घटती हरियाली और छोटे पक्षियों की कम होती संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है।विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर स्थानीय स्तर पर पक्षियों के संरक्षण के लिए सराहनीय पहल की जा रही है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी लोगों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर पक्षियों के लिए मिट्टी के जल-पात्र लगाए जा रहे हैं। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए उनके लिए सुरक्षित घोंसले भी तैयार किए जा रहे हैं। इस बार नारियल पानी पीने के बाद बचे हुए नारियल में छेद कर उन्हें पेड़ों पर टांगकर घोंसले का रूप दिया जाएगा, जिससे गौरैया जैसे छोटे पक्षियों को सुरक्षित आवास मिल सके।

बिंदु ठोंबरे ने बताया कि छोटे-छोटे प्रयासों से पक्षियों की घटती संख्या को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए तीन प्रमुख चीजें जरूरी हैं—भोजन, पानी और सुरक्षित आवास। शहरी क्षेत्रों में हरियाली कम होने से पक्षियों को घोंसला बनाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता, ऐसे में कृत्रिम व प्राकृतिक घोंसले उनके लिए सहायक साबित होते हैं।

उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि जहां भी खाली जल-पात्र दिखाई दें, उन्हें अवश्य भरें और इस तरह के छोटे-छोटे प्रयासों के जरिए प्रकृति संरक्षण में अपना योगदान दें।

कार्यक्रम में प्रीति पोद्दार, सीमा बजे, अर्चना चौहान एवं कविता नगर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

शाजापुर।अप्रैल माह की तेज गर्मी में जब तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच रहा है, वहीं घटती हरियाली और छोटे पक्षियों की कम होती संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है।विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर स्थानीय स्तर पर पक्षियों के संरक्षण के लिए सराहनीय पहल की जा रही है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी लोगों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर पक्षियों के लिए मिट्टी के जल-पात्र लगाए जा रहे हैं। साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए उनके लिए सुरक्षित घोंसले भी तैयार किए जा रहे हैं। इस बार नारियल पानी पीने के बाद बचे हुए नारियल में छेद कर उन्हें पेड़ों पर टांगकर घोंसले का रूप दिया जाएगा, जिससे गौरैया जैसे छोटे पक्षियों को सुरक्षित आवास मिल सके।

बिंदु ठोंबरे ने बताया कि छोटे-छोटे प्रयासों से पक्षियों की घटती संख्या को बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए तीन प्रमुख चीजें जरूरी हैं—भोजन, पानी और सुरक्षित आवास। शहरी क्षेत्रों में हरियाली कम होने से पक्षियों को घोंसला बनाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता, ऐसे में कृत्रिम व प्राकृतिक घोंसले उनके लिए सहायक साबित होते हैं।

उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की है कि जहां भी खाली जल-पात्र दिखाई दें, उन्हें अवश्य भरें और इस तरह के छोटे-छोटे प्रयासों के जरिए प्रकृति संरक्षण में अपना योगदान दें।

कार्यक्रम में प्रीति पोद्दार, सीमा बजे, अर्चना चौहान एवं कविता नगर सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से तीन घायल, डायल 112 ने पहुंचाया अस्पताल

दिव्यांग होने के बावजूद जनगणना कार्य में निभा रहे अहम भूमिका

डॉलर समूह के चैयरमैन के निधन से आर्य जगत में शोक व्याप्त।

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विधिक जागरूकता शिविर का सफल आयोजन

चलते ट्रक से बदमाशों ने चुराया माल, वीडियो हो रहा वायरल