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गेहूं खरीदी में देरी से किसानों का फूटा गुस्सा, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन

शाजापुर। मध्यप्रदेश के शाजापुर में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में हो रही देरी को लेकर किसानों का आक्रोश सड़कों पर नजर आया। भारतीय किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान दोपहिया वाहनों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे। हाथों में झंडे और बैनर लिए किसानों ने खरीदी प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल तैयार होकर खलिहानों में पड़ी है, लेकिन खरीदी की तारीख लगातार आगे बढ़ाई जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी देरी का फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं और उन्हें मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। उनका कहना है कि प्रति क्विंटल ₹400 से ₹500 तक का नुकसान हो रहा है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द खरीदी शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। आने वाले दिनों में चक्काजाम और अनिश्चितकालीन धरना जैसे बड़े आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है। फिलहाल किसानों के इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई

शाजापुर। मध्यप्रदेश के शाजापुर में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में हो रही देरी को लेकर किसानों का आक्रोश सड़कों पर नजर आया। भारतीय किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा गया।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान दोपहिया वाहनों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे। हाथों में झंडे और बैनर लिए किसानों ने खरीदी प्रक्रिया में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल तैयार होकर खलिहानों में पड़ी है, लेकिन खरीदी की तारीख लगातार आगे बढ़ाई जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी देरी का फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं और उन्हें मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। उनका कहना है कि प्रति क्विंटल ₹400 से ₹500 तक का नुकसान हो रहा है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द खरीदी शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। आने वाले दिनों में चक्काजाम और अनिश्चितकालीन धरना जैसे बड़े आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है। फिलहाल किसानों के इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई

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