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जल है तो कल है”, जल जीवन मिशन से बदली ग्राम सिहोरा की तस्वीर

जल है तो कल है”, जल जीवन मिशन से बदली ग्राम सिहोरा की तस्वीर

विराट सवेरा आशीष नेवारे।

“जल है तो कल है” यह कथन ग्राम सिहोरा, ग्राम पंचायत सिहोरा, विकासखण्ड लालबर्रा, जिला बालाघाट (म.प्र.) में आज पूरी तरह साकार होता दिखाई दे रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 32 किलोमीटर दूर स्थित यह ग्राम, जहाँ कभी शुद्ध पेयजल एक बड़ी चुनौती हुआ करता था, आज जल जीवन मिशन के माध्यम से स्वच्छ, सुरक्षित और सतत जल आपूर्ति का उदाहरण बन चुका है। ग्राम सिहोरा की वर्तमान जनसंख्या लगभग 1907 है। यहाँ के अधिकांश निवासी कृषि एवं मजदूरी पर निर्भर हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक गाँव में पीने और दैनिक उपयोग के लिए पानी लाना अत्यंत कठिन कार्य था। ग्रामीणों को दूर-दराज के कुओं, तालाबों और हैंडपंपों पर लाइन लगाकर पानी लाना पड़ता था। इसमें अत्यधिक समय और श्रम लगता था, जिससे घरेलू एवं कृषि कार्यों में विलंब होता था। कई बार समय पर खेतों में कार्य न हो पाने से गरीब किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता था। इसके साथ ही शुद्ध पेयजल की उपलब्धता न होने के कारण गाँव में उल्टी, दस्त, बुखार जैसी जलजनित बीमारियाँ आम थीं, जिससे ग्रामीणों को शारीरिक कष्ट के साथ-साथ आर्थिक हानि भी सहनी पड़ती थी। परंतु जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन के बाद ग्राम सिहोरा के जीवन में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला। अब ग्रामीणों को घर-घर नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है। समय पर स्वच्छ जल मिलने से बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है। बच्चे और बड़े सभी स्वस्थ रहने लगे हैं। महिलाएँ अब दूर से पानी ढोने के कठिन कार्य से मुक्त हो गई हैं, जिससे उनका समय बच रहा है और वे घरेलू व अन्य कार्य सुचारु रूप से कर पा रही हैं। शुद्ध जल की निरंतर उपलब्धता से कृषि कार्य समय पर होने लगे हैं, जिससे उत्पादन और आय में भी सुधार हुआ है। बच्चे समय पर स्कूल जाने लगे हैं और ग्रामीणों के दैनिक जीवन में अनुशासन व सुविधा बढ़ी है।वर्तमान में ग्राम सिहोरा में 377 नल कनेक्शन स्थापित हो चुके हैं तथा ग्राम का हर घर जल रिपोर्टेड एवं प्रमाणीकरण पूर्ण हो चुका है। इससे यह ग्राम जल जीवन मिशन की सफलता का सशक्त उदाहरण बन गया है।आज ग्राम सिहोरा के निवासियों के जीवन में आया यह सकारात्मक बदलाव सभी के चेहरे पर खुशी की लहर लेकर आया है। ग्रामवासियों ने जल जीवन मिशन के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, बालाघाट (म.प्र.) के प्रति कोटि-कोटि धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया है। यह कहानी दर्शाती है कि जब नीति, नियोजन और जनभागीदारी एक साथ मिलती है, तब “जल है तो कल है” केवल नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की सच्चाई बन जाता है।

जल है तो कल है”, जल जीवन मिशन से बदली ग्राम सिहोरा की तस्वीर

विराट सवेरा आशीष नेवारे।

“जल है तो कल है” यह कथन ग्राम सिहोरा, ग्राम पंचायत सिहोरा, विकासखण्ड लालबर्रा, जिला बालाघाट (म.प्र.) में आज पूरी तरह साकार होता दिखाई दे रहा है। जिला मुख्यालय से लगभग 32 किलोमीटर दूर स्थित यह ग्राम, जहाँ कभी शुद्ध पेयजल एक बड़ी चुनौती हुआ करता था, आज जल जीवन मिशन के माध्यम से स्वच्छ, सुरक्षित और सतत जल आपूर्ति का उदाहरण बन चुका है। ग्राम सिहोरा की वर्तमान जनसंख्या लगभग 1907 है। यहाँ के अधिकांश निवासी कृषि एवं मजदूरी पर निर्भर हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक गाँव में पीने और दैनिक उपयोग के लिए पानी लाना अत्यंत कठिन कार्य था। ग्रामीणों को दूर-दराज के कुओं, तालाबों और हैंडपंपों पर लाइन लगाकर पानी लाना पड़ता था। इसमें अत्यधिक समय और श्रम लगता था, जिससे घरेलू एवं कृषि कार्यों में विलंब होता था। कई बार समय पर खेतों में कार्य न हो पाने से गरीब किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता था। इसके साथ ही शुद्ध पेयजल की उपलब्धता न होने के कारण गाँव में उल्टी, दस्त, बुखार जैसी जलजनित बीमारियाँ आम थीं, जिससे ग्रामीणों को शारीरिक कष्ट के साथ-साथ आर्थिक हानि भी सहनी पड़ती थी। परंतु जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन के बाद ग्राम सिहोरा के जीवन में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला। अब ग्रामीणों को घर-घर नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है। समय पर स्वच्छ जल मिलने से बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है। बच्चे और बड़े सभी स्वस्थ रहने लगे हैं। महिलाएँ अब दूर से पानी ढोने के कठिन कार्य से मुक्त हो गई हैं, जिससे उनका समय बच रहा है और वे घरेलू व अन्य कार्य सुचारु रूप से कर पा रही हैं। शुद्ध जल की निरंतर उपलब्धता से कृषि कार्य समय पर होने लगे हैं, जिससे उत्पादन और आय में भी सुधार हुआ है। बच्चे समय पर स्कूल जाने लगे हैं और ग्रामीणों के दैनिक जीवन में अनुशासन व सुविधा बढ़ी है।वर्तमान में ग्राम सिहोरा में 377 नल कनेक्शन स्थापित हो चुके हैं तथा ग्राम का हर घर जल रिपोर्टेड एवं प्रमाणीकरण पूर्ण हो चुका है। इससे यह ग्राम जल जीवन मिशन की सफलता का सशक्त उदाहरण बन गया है।आज ग्राम सिहोरा के निवासियों के जीवन में आया यह सकारात्मक बदलाव सभी के चेहरे पर खुशी की लहर लेकर आया है। ग्रामवासियों ने जल जीवन मिशन के लिए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, बालाघाट (म.प्र.) के प्रति कोटि-कोटि धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया है। यह कहानी दर्शाती है कि जब नीति, नियोजन और जनभागीदारी एक साथ मिलती है, तब “जल है तो कल है” केवल नारा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की सच्चाई बन जाता है।

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