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समूह बनाकर नाबालिग से दुष्कर्म पांच आरोपियों को आजीवन कारावास

किशोर सिंह राजपूत 9981757273

शाजापुर। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), शाजापुर ने नाबालिग पीड़िता के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और अपराध में सहयोग के मामले में पांच आरोपियों को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। प्रमुख आरोपियों को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा दी गई है।

न्यायालय ने आरोपी मयंक उर्फ गोलू विश्वकर्मा, शाहदत उर्फ राजा खान और अनस उर्फ अनीस खान को बीएनएस, पॉक्सो एक्ट एवं एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में दोषी पाया। इन तीनों को सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास सहित अन्य धाराओं में अलग-अलग कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया।

वहीं आरोपी दुर्गेश राठौर को भी नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर अपराधों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास एवं अन्य सजाएं सुनाई गईं। प्रकरण में आरोपी सुनीता राठौर को अपराध में सहयोग और साझा मंशा के आधार पर दोषी ठहराते हुए एससी/एसटी एक्ट में आजीवन कारावास के साथ अन्य धाराओं में कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।

पिता ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी

जिला मीडिया सेल प्रभारी एवं सहायक निदेशक (एससी/एसटी) प्रतीक श्रीवास्तव के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 26 जून 2025 को थाना शुजालपुर मंडी में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 30 जून 2025 को पीड़िता के दस्तयाब होने के बाद उसने महिला पुलिस अधिकारी को घटनाक्रम की जानकारी दी।

पीड़िता के अनुसार, वह 25 जून की रात घर से पैदल निकली थी। इस दौरान एक पिकअप वाहन उसके पास आकर रुका। आरोपी मयंक ने कथित रूप से चाकू दिखाकर उसे धमकाया और वाहन में बैठा लिया। वाहन में मौजूद अन्य आरोपियों के साथ उसे अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया।

ढाबे के तलघर में किया सामूहिक दुष्कर्म

पीड़िता के कथन के अनुसार, आरोपियों ने उसे एक ऑटो रिक्शा से मेवाड़ा ढाबे पर पहुंचाया। वहां कथित रूप से ढाबे का ताला खुलवाने के बाद उसे तलघर में ले जाया गया, जहां तीन आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

इसके बाद पीड़िता को शाजापुर लाया गया, जहां उसे जबरन दुर्गेश राठौर के साथ रखा गया। पीड़िता के अनुसार, वहां भी उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ दुष्कर्म किया गया। बाद में उसे अकोदिया और इंदौर सहित अन्य स्थानों पर ले जाया गया, जहां उसके साथ अपराध किए जाने के आरोप सामने आए।

डीएनए मिलान बना महत्वपूर्ण साक्ष्य

विवेचना के दौरान पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया और पीड़िता से जब्त प्रदर्शों की वैज्ञानिक जांच कराई। जब्त प्रदर्शों से आरोपियों के डीएनए का मिलान होना अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। इसके बाद पुलिस ने संपूर्ण विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।

महिला भी हो सकती है सामूहिक दुष्कर्म में जिम्मेदार

न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म कराने की साझा मंशा रखती है या अपराध में सहायता करती है, तो उसे भी अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके लिए उसका स्वयं शारीरिक कृत्य में शामिल होना आवश्यक नहीं है।

न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित बीएनएस की धारा 70(2) के प्रावधानों पर भी स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि समूह बनाकर या समान आशय से 18 वर्ष से कम आयु की महिला के साथ बलात्कार करने की स्थिति में समूह के प्रत्येक व्यक्ति को अपराध के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

इन आरोपियों को मिली प्रमुख सजाएं

मयंक उर्फ गोलू, शाहदत उर्फ राजा और अनस उर्फ अनीस को सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट एवं एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में आजीवन कारावास सहित अन्य सजाएं।

दुर्गेश राठौर को दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट एवं एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में आजीवन कारावास सहित विभिन्न सजाएं।

सुनीता राठौर को अपराध में सहयोग और गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास सहित अन्य कठोर सजाएं।

प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सोलंकी एवं विशेष लोक अभियोजक प्रदीप कुमार भटेले ने पैरवी की। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों से सहमत होते हुए सभी आरोपियों के विरुद्ध दोषसिद्धि का निर्णय पारित किया।

किशोर सिंह राजपूत 9981757273

शाजापुर। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), शाजापुर ने नाबालिग पीड़िता के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और अपराध में सहयोग के मामले में पांच आरोपियों को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। प्रमुख आरोपियों को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा दी गई है।

न्यायालय ने आरोपी मयंक उर्फ गोलू विश्वकर्मा, शाहदत उर्फ राजा खान और अनस उर्फ अनीस खान को बीएनएस, पॉक्सो एक्ट एवं एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में दोषी पाया। इन तीनों को सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास सहित अन्य धाराओं में अलग-अलग कठोर कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया।

वहीं आरोपी दुर्गेश राठौर को भी नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर अपराधों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास एवं अन्य सजाएं सुनाई गईं। प्रकरण में आरोपी सुनीता राठौर को अपराध में सहयोग और साझा मंशा के आधार पर दोषी ठहराते हुए एससी/एसटी एक्ट में आजीवन कारावास के साथ अन्य धाराओं में कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।

पिता ने दर्ज कराई थी गुमशुदगी

जिला मीडिया सेल प्रभारी एवं सहायक निदेशक (एससी/एसटी) प्रतीक श्रीवास्तव के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 26 जून 2025 को थाना शुजालपुर मंडी में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 30 जून 2025 को पीड़िता के दस्तयाब होने के बाद उसने महिला पुलिस अधिकारी को घटनाक्रम की जानकारी दी।

पीड़िता के अनुसार, वह 25 जून की रात घर से पैदल निकली थी। इस दौरान एक पिकअप वाहन उसके पास आकर रुका। आरोपी मयंक ने कथित रूप से चाकू दिखाकर उसे धमकाया और वाहन में बैठा लिया। वाहन में मौजूद अन्य आरोपियों के साथ उसे अलग-अलग स्थानों पर ले जाया गया।

ढाबे के तलघर में किया सामूहिक दुष्कर्म

पीड़िता के कथन के अनुसार, आरोपियों ने उसे एक ऑटो रिक्शा से मेवाड़ा ढाबे पर पहुंचाया। वहां कथित रूप से ढाबे का ताला खुलवाने के बाद उसे तलघर में ले जाया गया, जहां तीन आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया।

इसके बाद पीड़िता को शाजापुर लाया गया, जहां उसे जबरन दुर्गेश राठौर के साथ रखा गया। पीड़िता के अनुसार, वहां भी उसकी इच्छा के विरुद्ध उसके साथ दुष्कर्म किया गया। बाद में उसे अकोदिया और इंदौर सहित अन्य स्थानों पर ले जाया गया, जहां उसके साथ अपराध किए जाने के आरोप सामने आए।

डीएनए मिलान बना महत्वपूर्ण साक्ष्य

विवेचना के दौरान पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया और पीड़िता से जब्त प्रदर्शों की वैज्ञानिक जांच कराई। जब्त प्रदर्शों से आरोपियों के डीएनए का मिलान होना अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। इसके बाद पुलिस ने संपूर्ण विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।

महिला भी हो सकती है सामूहिक दुष्कर्म में जिम्मेदार

न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म कराने की साझा मंशा रखती है या अपराध में सहायता करती है, तो उसे भी अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके लिए उसका स्वयं शारीरिक कृत्य में शामिल होना आवश्यक नहीं है।

न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित बीएनएस की धारा 70(2) के प्रावधानों पर भी स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि समूह बनाकर या समान आशय से 18 वर्ष से कम आयु की महिला के साथ बलात्कार करने की स्थिति में समूह के प्रत्येक व्यक्ति को अपराध के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

इन आरोपियों को मिली प्रमुख सजाएं

मयंक उर्फ गोलू, शाहदत उर्फ राजा और अनस उर्फ अनीस को सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट एवं एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में आजीवन कारावास सहित अन्य सजाएं।

दुर्गेश राठौर को दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट एवं एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में आजीवन कारावास सहित विभिन्न सजाएं।

सुनीता राठौर को अपराध में सहयोग और गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास सहित अन्य कठोर सजाएं।

प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सोलंकी एवं विशेष लोक अभियोजक प्रदीप कुमार भटेले ने पैरवी की। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों से सहमत होते हुए सभी आरोपियों के विरुद्ध दोषसिद्धि का निर्णय पारित किया।

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