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यहां सब की मुराद होती है पूरी, इसलिए नाम है मुरादपुरा हनुमान

बाल रूप में विराजमान है बजरंगबली

किशोरसिंह राजपूत, शाजापुर।

शहर के अंतिम किनारे पर स्थित बजरंगबली का मुरादपुरा हनुमान मंदिर शहरवासियों की आस्था का केंद्र है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां बाल रूप में विराजमान बजरंगबली सब की मुराद पूरी करते हैं। इसलिए यहां लोग अपनी मुरादों की अर्जी लगाते हैं। यहां पर हनुमान जन्मोत्सव, हनुमान अष्टमी के साथ ही विभिन्न पर्व त्यौहार उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। हर दिन यहां कई लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खास तौर पर शनिवार और मंगलवार को यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। बाबा का आकर्षक श्रंगार भी दर्शनार्थियों को आकर्षित करता है। बाबा की बाल रूप की मूर्ति भी ऐसी है मानो भक्तों से नज़रे मिलाकर बातें करती हो। यहां आने वाले भक्त भी बाबा से इसी भाव में मिलाप करते हैं। जैसे बाबा उनकी बात सुन रहे हैं, और जरूर उनकी मुराद पूरी होगी। कई लोग ऐसे हैं जो इस बात के साक्षी हैं कि जब वह सब तरफ से थक चुके थे। तब बाबा मुरादपुरा ने ही उन्हें मंजिल तक पहुंचाया। ऐसे कई लोग हैं जो नियमित रूप से यहां दर्शन के लिए हर दिन आते हैं। फिर चाहे तेज वर्षा हो, कड़ाके की ठंड हो या अन्य कोई व्यस्तता पर वह बाबा के दरबार में आकर दर्शन करना नहीं भूलते।

130 वर्ष से अधिक पुराना मंदिर

बाल रूप बजरंगबली का यह मंदिर करीब 130 वर्ष पुराना है।

जिस भूमि पर मंदिर बना है, वहां पर खेत था। रजक समाज के बेजु बा को सपने में हनुमानजी ने इस स्थान का संकेत दिया। खुदाई में बालरूप में खड़े हनुमानजी मूर्ति मिली। यहां मंदिर बनाया गया और आज यह मन्दिर शहरवासियों के साथ ही दूर दराज के लोगों की आस्था का केंद्र है। सपने में मिले संकेत के बाद खुदाई से वहां छोटी सी कुंडी बन गई। इस कुंडी में पानी कभी खत्म नहीं होता। पूरे शहर में वर्ष 2008 में सूखे की स्थिति बनी लेकिन यह कुंडी पानी से भरी थी।

बाल रूप में विराजमान है बजरंगबली

किशोरसिंह राजपूत, शाजापुर।

शहर के अंतिम किनारे पर स्थित बजरंगबली का मुरादपुरा हनुमान मंदिर शहरवासियों की आस्था का केंद्र है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां बाल रूप में विराजमान बजरंगबली सब की मुराद पूरी करते हैं। इसलिए यहां लोग अपनी मुरादों की अर्जी लगाते हैं। यहां पर हनुमान जन्मोत्सव, हनुमान अष्टमी के साथ ही विभिन्न पर्व त्यौहार उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। हर दिन यहां कई लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खास तौर पर शनिवार और मंगलवार को यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। बाबा का आकर्षक श्रंगार भी दर्शनार्थियों को आकर्षित करता है। बाबा की बाल रूप की मूर्ति भी ऐसी है मानो भक्तों से नज़रे मिलाकर बातें करती हो। यहां आने वाले भक्त भी बाबा से इसी भाव में मिलाप करते हैं। जैसे बाबा उनकी बात सुन रहे हैं, और जरूर उनकी मुराद पूरी होगी। कई लोग ऐसे हैं जो इस बात के साक्षी हैं कि जब वह सब तरफ से थक चुके थे। तब बाबा मुरादपुरा ने ही उन्हें मंजिल तक पहुंचाया। ऐसे कई लोग हैं जो नियमित रूप से यहां दर्शन के लिए हर दिन आते हैं। फिर चाहे तेज वर्षा हो, कड़ाके की ठंड हो या अन्य कोई व्यस्तता पर वह बाबा के दरबार में आकर दर्शन करना नहीं भूलते।

130 वर्ष से अधिक पुराना मंदिर

बाल रूप बजरंगबली का यह मंदिर करीब 130 वर्ष पुराना है।

जिस भूमि पर मंदिर बना है, वहां पर खेत था। रजक समाज के बेजु बा को सपने में हनुमानजी ने इस स्थान का संकेत दिया। खुदाई में बालरूप में खड़े हनुमानजी मूर्ति मिली। यहां मंदिर बनाया गया और आज यह मन्दिर शहरवासियों के साथ ही दूर दराज के लोगों की आस्था का केंद्र है। सपने में मिले संकेत के बाद खुदाई से वहां छोटी सी कुंडी बन गई। इस कुंडी में पानी कभी खत्म नहीं होता। पूरे शहर में वर्ष 2008 में सूखे की स्थिति बनी लेकिन यह कुंडी पानी से भरी थी।

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