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पंचदेहरिया में खुदाई के दौरान मिले 2000 वर्ष प्राचीन अवशेष, पुरातत्व विभाग सक्रिय

आरबी सोनू मीणा

 शाजापुर ।जिले के ग्राम पंचदेहरिया स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक धरोहर चतुर्भुज जी महाराज स्थल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हाल ही में खुदाई के दौरान यहां से लगभग 2000 वर्ष प्राचीन ईंटों की दीवारें, संरचनाएं एवं मृदभांड के अवशेष** सामने आए हैं। इसके बाद राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का क्षेत्रीय दल (उज्जैन) सक्रिय हुआ और स्थल का विस्तृत निरीक्षण एवं सर्वेक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट में इस स्थल को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, स्थल पर मिली विष्णु जी की प्रतिमाएं 8वीं से 12वीं शताब्दी के परमार काल की प्रतीत होती हैं, जबकि हालिया खुदाई में निकली ईंटों की दीवारें एवं सामग्री **मौर्य, शुंग व कुषाण कालीन प्रारंभिक ऐतिहासिक युग** से संबंधित मानी जा रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक कालखंडों का साक्षी रहा है।

निरीक्षण दल ने यह भी उल्लेख किया है कि समय के साथ उपेक्षा, प्राकृतिक क्षरण और मानवजनित गतिविधियों के कारण यह धरोहर प्रभावित हुई है। कुछ स्थानों पर अतिक्रमण और अनियंत्रित उपयोग के संकेत भी मिले हैं, जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक पद्धति से पुरातात्विक उत्खनन, स्थल का सीमांकन, सुरक्षा एवं संरक्षण की आवश्यकता जताई है।रिपोर्ट सामने आने के बाद ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक संगठनों ने जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण और उत्खनन कराया गया तो यह स्थल धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है, जिससे रोजगार के अवसर और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि चतुर्भुज जी महाराज स्थल को संरक्षित घोषित कर पुरातत्व विभाग के माध्यम से शीघ्र उत्खनन एवं दीर्घकालीन संरक्षण की ठोस योजना बनाई जाए, ताकि यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

आरबी सोनू मीणा

 शाजापुर ।जिले के ग्राम पंचदेहरिया स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक धरोहर चतुर्भुज जी महाराज स्थल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हाल ही में खुदाई के दौरान यहां से लगभग 2000 वर्ष प्राचीन ईंटों की दीवारें, संरचनाएं एवं मृदभांड के अवशेष** सामने आए हैं। इसके बाद राज्य पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का क्षेत्रीय दल (उज्जैन) सक्रिय हुआ और स्थल का विस्तृत निरीक्षण एवं सर्वेक्षण किया गया। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट में इस स्थल को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, स्थल पर मिली विष्णु जी की प्रतिमाएं 8वीं से 12वीं शताब्दी के परमार काल की प्रतीत होती हैं, जबकि हालिया खुदाई में निकली ईंटों की दीवारें एवं सामग्री **मौर्य, शुंग व कुषाण कालीन प्रारंभिक ऐतिहासिक युग** से संबंधित मानी जा रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक कालखंडों का साक्षी रहा है।

निरीक्षण दल ने यह भी उल्लेख किया है कि समय के साथ उपेक्षा, प्राकृतिक क्षरण और मानवजनित गतिविधियों के कारण यह धरोहर प्रभावित हुई है। कुछ स्थानों पर अतिक्रमण और अनियंत्रित उपयोग के संकेत भी मिले हैं, जिससे इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक पद्धति से पुरातात्विक उत्खनन, स्थल का सीमांकन, सुरक्षा एवं संरक्षण की आवश्यकता जताई है।रिपोर्ट सामने आने के बाद ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सांस्कृतिक संगठनों ने जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण और उत्खनन कराया गया तो यह स्थल धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है, जिससे रोजगार के अवसर और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि चतुर्भुज जी महाराज स्थल को संरक्षित घोषित कर पुरातत्व विभाग के माध्यम से शीघ्र उत्खनन एवं दीर्घकालीन संरक्षण की ठोस योजना बनाई जाए, ताकि यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।

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