इतिहास की वापसी: कर्नल मार्टिन की छठी पीढ़ी ने बाबा बैजनाथ धाम में किए दर्शन
आगर-मालवा।महाशिवरात्रि पर्व इस वर्ष आगर के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास की पुनर्स्थापना का साक्षी बना। शनिवार को प्रसिद्ध बाबा बैजनाथ मंदिर में कर्नल मार्टिन के परिवार की छठी पीढ़ी से संबंध रखने वाली ऑस्ट्रेलिया निवासी शांति मैक्लोवर ने पहुंचकर बाबा के दर्शन किए और विधिवत पूजा-अर्चना की।
मंदिर परिसर में जैसे ही शांति मैक्लोवर पहुंचीं, श्रद्धालुओं और नगरवासियों में उत्सुकता का माहौल बन गया। यह पहला अवसर रहा जब गुलामी काल में भारत से विदेश गए कर्नल मार्टिन के वंशज पुनः उस भूमि पर पहुंचे, जहां से उनके परिवार का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंध जुड़ा रहा है।
दर्शन कर भावुक हुईं शांति मैक्लोवर
बाबा बैजनाथ के गर्भगृह में विशेष पूजन के दौरान शांति मैक्लोवर भावुक नजर आईं। दर्शन के बाद उन्होंने कहा कि “मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरे परिवार का रिश्ता भारत में इतनी गहरी आस्था और इतिहास से जुड़ा है। यह मेरे लिए अत्यंत गौरव और आध्यात्मिक अनुभव का क्षण है।”
उन्होंने इस ऐतिहासिक कड़ी को जोड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले ट्रैफिक इंचार्ज जगदीश यादव, उनके परिवार तथा मंदिर के मुख्य पुजारी मुकेश पूरी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि इनका वर्षों का प्रयास और शोध न होता तो शायद यह संबंध कभी उजागर नहीं हो पाता।
वर्षों के शोध से जुड़ी इतिहास की कड़ी
बाबा बैजनाथ मंदिर और कर्नल मार्टिन से जुड़े घटनाक्रम लंबे समय से जनश्रुतियों और स्थानीय कथाओं में प्रचलित थे। लेकिन ठोस प्रमाणों का अभाव था। आगर में पदस्थ ट्रैफिक इंचार्ज जगदीश यादव ने पुलिस सेवा के साथ-साथ ऐतिहासिक अभिलेखों, दस्तावेजों और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के माध्यम से वर्षों तक शोध किया।
मंदिर के मुख्य पुजारी मुकेश पूरी के सहयोग से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में निवासरत कर्नल मार्टिन के परिवार तक संपर्क स्थापित किया। यह प्रयास न केवल एक परिवार को उसकी जड़ों से जोड़ने में सफल रहा, बल्कि आगर के इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय को भी पुनर्जीवित कर गया।
बाबा बैजनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
मालवा अंचल में स्थित बाबा बैजनाथ धाम आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर का संबंध ब्रिटिश कालीन इतिहास से भी जुड़ा रहा है। कहा जाता है कि कर्नल मार्टिन का इस मंदिर से विशेष लगाव था और उन्होंने यहां सेवा व संरक्षण में भूमिका निभाई थी। समय के साथ यह कथा स्मृतियों में सिमट गई, परंतु अब परिवार की छठी पीढ़ी के आगमन ने इसे नया आधार दे दिया है।
महाशिवरात्रि पर मेले जैसा माहौल
महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन के साथ पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पार्किंग स्थल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए।
मंदिर प्रांगण में पूजन सामग्री, प्रसाद और खिलौनों की दुकानों से मेले जैसा दृश्य नजर आया।
आस्था और इतिहास का अनूठा संगम
इस वर्ष की महाशिवरात्रि आगर के लिए ऐतिहासिक क्षण लेकर आई। एक ओर हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर विदेश से लौटी छठी पीढ़ी अपने पूर्वजों की भूमि को नमन कर रही थी।
आगर शहर उस भावुक पल का साक्षी बना, जब इतिहास की बिछड़ी कड़ी पुनः अपनी जड़ों से जुड़ी — और यह संभव हुआ एक स्थानीय अधिकारी की लगन, शोध और सामाजिक प्रतिबद्धता के कारण।



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